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सुंदरता और छाया के साथ साथ मिलेगी लोकी,खीरा,करेला जैसी सब्जियां

सुंदरता और छाया के साथ साथ मिलेगी लोकी,खीरा,करेला जैसी सब्जियां


इसे हम मचान (परगोल) विधि से कमा सकते है दौ गुना लाभ।

गर्मियों में अगेती किस्म की बेल वाली सब्जियों को मचान विधि से लगाकर किसान अच्छी उपज पा सकते हैं। इनकी नसर्री तैयार करके इनकी खेती की जा सकती है। पहले इन सब्जियों की पौध तैयार की जाती है और फिर मुख्य खेत में जड़ों को बिना नुकसान पहुंचाये रोपण किया जाता है। इन सब्जियों की पौध तैयार करने से पौधे जल्दी तैयार होते हैं।

मचान में लौकी, खीरा, करेला जैसी बेल वाली फसलों की खेती की जा सकती है। मचान विधि से खेती करने से कई लाभ हैं। मचान में खेत में बांस या तार का जाल बनाकर सब्जियों की बेल को जमीन से ऊपर पहुंचाया जाता है। मचान का प्रयोग सब्जी उत्पादक बेल वाली सब्जियों को उगाने में करते हैं। मचान के माध्यम से किसान 90 प्रतिशत फसल को खराब होने से बचाया जा सकता है।

मचान की खेती के रूप में सब्जी उत्पादक करेला, लौकी, खीरा, सेम जैसी फसलों की खेती की जा सकती है। बरसात के मौसम में मचान की खेती फल को खराब होने से बचाती है। फसल में यदि कोई रोग लगता है तो दवा छिड़कने में भी आसानी होती है।

मचान के लाभ:-

1. गर्मी एवम वर्षात के दिनों में फल जमीन से लगकर खराब नही
होता,

2. गर्मी के दिनों में बेल की छाया के नीचे #धनिये की फसल लेकर
दौगुना लाभ कमा सकते है।

3. रोग और #बीमारियों का प्रकोप बहुत कम हो जाता है।

4. फल दिखने में बहुत #आकर्षक और स्वस्थ रहता है।

5. फल का बाजार भाव अच्छा मिलता है।

6. सस्य क्रिया करने में आसानी रहती है।

7. उत्पादन सामान्य की तुलना में अधिक होता है।

8. इस मचान के नीचे छाया चाहने वाली एवम कम बढ़ने वाली
सब्जियों की खेती की जा सकती है।

9. किसान को प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक आमदनी मिलेगी

10. आर्थिक स्थिति सुदृढ़ रहेगी।

Pintu Meena Pahadi
खेती की अवधारणा पिन्टु मीना पहाड़ी

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