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अजोला की खेती कैसे करें ?

अजोला की खेती कैसे करें ?


पंचायत जागरण संवाददाता
कृषि विज्ञान केंद्र हैदरगढ़ बाराबंकी के वैज्ञानिक डॉक्टर रिंकी चौहान ने बताया कि अजोला की खेती बहुत ही महत्वपूर्ण है अजोला की खेती पशुओं लिए एक पूरक पोषण का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। अजोला हरी खाद के तौर पर धान के खेत में भी इस्तेमाल किया जाता है जब धान के खेत की रोपाई होने के २० से २५ दिन हो जाए तब उसे डाल देंना चाहिए , उससे नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है इस वजह से धान की उपज में बढ़ोतरी देखने को मिलती है ।
इसी तरह अगर अजोला का इस्तेमाल हम पशुओं को चारे के साथ मिलकर दें तो पशुओं में भी पोषक तत्वों की कमी पूरी की जा सकती है। अजोला एक हरे कलर की काई के स्वरूप में देखने को मिलती है जिसकी अजोला एनाबिना,अजोला पिनाटा जैसी कई प्रजातियां पाई जाती हैं इसकी खेती बहुत ही आसान तरीके से की जा सकती है ।अजोला की खेती करने के लिए यदि सीमेंटेड टैंक ना हो तो हम जमीन में 2 से 3 फीट गहरा गड्ढा खोदकर भी इसकी खेती कर सकते हैं अगर हमें जमीन में करना है तो 2 से 3 फीट गहरा 5 से 6 फीट लंबा 2 फीट चौड़ा गहरा गड्ढा खोदे उसके अंदर काले रंग की तिरपाल बिछा दे जिससे कि अगर यदि पानी डाला जाए तो वह तुरंत जमीन में अवशोषित ना हो जाए इस तिरपाल बिछाने के बाद उसे गड्ढे में मिट्टी और गोबर का मिश्रण करें और पानी मिलाकर घोल तैयार करें अब उसे गड्ढे को पानी से भर दे परंतु एक फिट ऊपर से खाली होना चाहिए ।अब इसके बाद इस गड्ढे में अजोला के कल्चर को इसके अंदर डाल दे, आप देखेंगे की 15 से 20 दिन के भीतर या पूरा गड्ढा भर जाएगा अब इसके बाद आप देखेंगे कि प्रतिदिन 2 से 3 किलो अजोला उसे गड्ढे से आप हार्वेस्ट/ उत्पादन ले सकते हैं और आप गाय भैंस मछली बकरी या बत्तख को भी खिला सकते हैं जिससे कि उनकी पोषक तत्वों की कमी पूरी की जा सके । अजोला की खेती एक नई तकनीक है जिसे किसान भाइयों और बहनों को अपनाना चाहिए और इसकी खेती करनी चाहिए इससे किसने की आय दोगुनी करने में सहायता होगी और पशुओं के अनाज खिलाने में भी पूरक आहार के तरीके में सहायता मिलेगी। पशुओं को अजोला खिलाने से उनके दुख दुग्ध उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है अजोला एक जैव उर्वरक है। अजोला की खेती के समय यह विशेष ध्यान देना चाहिए कि उसे गर्मियों के दिन में सीधे धूप से बचाया जा सके नही तो वह सुख जाएगा।
अजोला की खेती के लिए छांव जरूरी है अगर किसी बड़े पेड़ के छाव के नीचे भी गड्ढा बना कर किया जाए तो भी वह अच्छी तरह से विकसित होगा या तो फिर अगर सीमेंटेड टैंक में कर रहे हैं तो उसके ऊपर शेड बनाना जरूरी है।

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