टमाटर की फसल में फलीछेदक किट के प्रबंधन के लिए अपनाए आइपीएम तकनीक

पंचायत जागरण संवाददाता
कृषि विज्ञान केंद्र हैदरगढ़ बाराबंकी के वैज्ञानिकों द्वारा प्रगतिशील किसान नवनीत वर्मा गांव तेजवापुर ब्लाक त्रिवेदीगंज जनपद बाराबंकी के टमाटर के खेत का निरीक्षण किया गया। नवनीत वर्मा जी गर्मी के मौसम में होने वाले टमाटर की खेती कई सालों से कर रहे हैं साथ ही साथ केले का भी बहुत ही अच्छा उत्पादन करते हैं। केले की वह ग्रैंड 9 टिशु कल्चर का पौधा अपने खेत पर लगाते हैं और उसमें भी अच्छा मुनाफा कमाते हैं ।
कृषि विज्ञान केंद् हैदरगढ़ पर वैज्ञानिक डॉक्टर रिंकी चौहान द्वारा लगाए गए अलग अलग फसलों जैसे की आम में फलमक्खी ट्रैप , टमाटर में फेरोमोन ट्रैप, नीला चिप चिपा फंदा, पीला चिप चिपा फंदा वगेरे उन्होंने लगे हुए देखे, और कैसे उसमे किट आकर्षित होकर उसमे मृत हो जाते है वह देख के बहुत ही प्रभावित हुए ,जिसकी प्रेरणा से उन्होंने भी अपने टमाटर के खेत में इस तरह के ट्रैप लगाने का निश्चय किया। उन्होंने डाक्टर रिंकी चौहान द्वारा जानकारी भी हासिल की हम किस फसल में किस ट्रैप का इस्तेमाल किस किट के लिए कर सकते है।
इसीके साथ उन्होंने टमाटर की खेती विशेष तकनीक जो की आईपीएम तकनीक है एकीकृत नशीजीव प्रबंधन की नई पद्धतिअपनाई है जिसके तहत उन्होंने इस साल टमाटर के खेत में टमाटर के खेत में जो फली छेदक किट से नुकसान होता था , जो फल को छेद करके उसे नुकसान पहुंचाते थे ,वह बहुत ही कम हो गया । टोमेटो फ्रूट बोरर, हेलीकोवरपा आर्मिजेरा इस किट के व्यवस्थापन के लिए उन्होंने फेरोमॉन ट्रैप लगाया तथा सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए नीला चिपचिपा फंदा लगाया इस साल उन्हें जो टमाटर के फल में फली छेदक का नुकसान देखने को मिलता था या फिर टमाटर के फल के ऊपर काले कलर छोटे व बड़े छेद देखने को मिलते थे वह बहुत ही कम देखने को मिला या तो फिर कहे की फली छेदक से होने वाला नुकसान बहुत ही कम देखने को मिला । उनके खेत पर निरीक्षण के दौरान लगे हुए एक फेरोमान ट्रैप में डॉक्टर रिंकी चौहान द्वारा पाया गया की एक हेलीकोवर्पा किट के नर पतंगे लगभग 40 से 50 पतंगे देखने को मिले तो इस तरह से उनके खेत में फली छेदक का नुकसान बहुत ही कम पाया गया क्योंकि फली छेदक किट की एक मादा लगभग २०० से २५० अंडे समूह में देती है और अगर इसका व्यवस्थापन हम एकीकृत नशीजिव प्रबंधन तकनीक से करे तो खेत में हम बहुत अच्छे स्तर तक इसके नुकसान से रोक सकते है ।उन्होंने अबकी बार पाया की टमाटर के फल हैं वह पूरी तरह से स्वस्थ है जिनकी बिक्री होने में कोई भी कठिनाई नहीं हो रही है।
डॉक्टर अश्वनी सिंह प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र हैदरगढ़ उन्होंने जो भी टमाटर की नई-नई प्रजातियां है उसकी चर्चा की और जिले के किसान कैसे उसे अपना रहे हैं। डॉक्टर रूपन रघुवंशी ने उनसे जो भी टमाटर की खेती में टमाटर को बेचने के लिए वह कौन सी मार्केटिंग चैनल अपनाते हैं कैसे बेचते है इस पर विस्तृत चर्चा की।
डॉक्टर समीर कुमार पांडे वैज्ञानिक फसल कार्यिकी उन्होंने किस तरह से नवनीत वर्मा जी गांव के लोगो के साथ मिलकर एकजुट होकर उत्पादन कर उसे कैसे समूह में एकसाथ बेचने से फायदा हो रहा है ,इस पर चर्चा किया। नवनीत जी का कहना है कि इस साल उनके टमाटर का उत्पादन बहुत ही बढ़िया हुआ और फली छेद का नुकसान बहुत ही कम देखने को मिला और टमाटर में भी जो सफेद मक्खी से नुकसान होता था वह बहुत ही कम हुआ है और टमाटर का उत्पादन बढा है । वह आईपीएम तकनीक की जानकारी उनसे जुड़े हुए किसानों को भी देते है ,
मार्गदर्शन भी करते है की जिससे की ज्यादा ज्यादा किसान बाराबंकी जनपद के इस नई तकनीक को अपनाए।
बाराबंकी जनपद के उप कृषि निदेशक श्रवण कुमारजी ने सोलर ट्रैप लगाने का भी सुझाव दिया।
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